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मेरे संग गुरु रविदास , MERE SANG GURU RAVIDAS | MULNIVASI POEM

  मेरे संग गुरु रविदास किसी से क्यो डरना वो पढ़ाएं समता पाठ किसी से क्यों डरना वो चाहें सबकी खुशहाली हो किसान हो या कोई माली है जीवन सबक...

 



मेरे संग गुरु रविदास किसी से क्यो डरना

वो पढ़ाएं समता पाठ किसी से क्यों डरना
वो चाहें सबकी खुशहाली
हो किसान हो या कोई माली
है जीवन सबका समान कि घुटकर क्यो मरना

मेरे संग गुरु रविदास किसी से क्यो डरना
वो पढ़ाएं समता पाठ किसी से क्यों डरना

हर जीवन है पानी से,अमृत उनकी वाणी से
वो बांटते सबमे ज्ञान,जो मानवता की शान
कैसे ,
जाति जाति में जात है जो केलन के पात
रैदास मनुस ना जुड़ सके जब तक जात न जात
जाति खतम बनाओ वैक्सीन
काम है इस पर करना
मेरे संग गुरु रविदास किसी से क्यो डरना
वो पढ़ाएं समता पाठ किसी से क्यों डरना

भारत मे राज हो ऐसा जहां खूब हो सब पर पैसा
ना देश मे भूखा कोई यहां समता नीति होई
ये कह गए रविदास
ऐसा चाहूं राज मैं, जहां मिले सबन को अन्न,
छोट बड़ा सब संग बसे रैदास रहे प्रसन्न
रैदास रहे प्रसन्न
इस प्रसन्नता की खातिर हां प्रसन्नता की खातिर मानवता में रहना
मेरे संग गुरु रविदास किसी से क्यो डरना
वो पढ़ाएं समता पाठ किसी से क्यों डरना
वो चाहें सबकी खुशहाली
हो किसान हो या कोई माली
है जीवन सबका समान कि घुटकर क्यो मरना
मेरे संग गुरु रविदास किसी से क्यो डरना
वो पढ़ाएं समता पाठ किसी से क्यों डरना

~ मेरे संग गुरु रविदास | महेंद्र सिंह कामा









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