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TU HI MANJIL TU HI HAMNAWA , तू ही मंजिल तू ही हमनवा | MAHENDRA CAMA

  तू ही मंजिल, तू ही हमनवा, तू ही है सुकून तू ही है दुआ तू ही मन्नत, तू ही जन्नत, तू ही खुशबू, तू ही है हवा तुझसे ही सुबह तुझसे ही है शाम...

 

तू ही मंजिल, तू ही हमनवा, तू ही है सुकून तू ही है दुआ
तू ही मन्नत, तू ही जन्नत, तू ही खुशबू, तू ही है हवा

तुझसे ही सुबह तुझसे ही है शाम, तू ही मेरे दिल का अरमान
तेरी बातें,मुलाकातें प्यारी हैं बहुत, तू मेरा आसमान

बादल सा लगे तेरा आंचल,और तेरा नूर गुलशन का आदर
तुझसे नजरें और नजारें , तू ही मेरी प्यास और सागर

तू ही आफताब तू ही मेरा मून, तू धड़कन तू ही है जुनून
तू ही संगीत तू ही सरगम , तू ही मेरा गीत तू ही मेरी धुन

तू ही मंजिल, तू ही हमनवा, तू ही है सुकून तू ही है दुआ
तू ही मन्नत तू ही जन्नत तू ही खुशबू तू ही है हवा

तू ही चाहत तू ही मर्जी , मेरी चाहत की तू है अर्जी
तू ही मेरे प्यार का सावन तू ही पौष की सर्दी

तू ही मेरा दिल,तू ही धड़कन,तू ही मेरी सांसे तू दिल की वासनी
तुझसे है मिठास, तू ही है मधुल , तेरी बातें जैसे चासनी

तू ही दौलत तू ही शोहरत, तू ही रुतबा मेरा है बनी
तेरा मेरा साथ ऐसे है लगे, मैं तेरा मराल तू मेरी हंसनी

तू ही मंजिल, तू ही हमनवा, तू ही है सुकून तू ही है दुआ
तू ही मन्नत तू ही जन्नत तू ही खुशबू तू ही है हवा

~ तू मंजिल तू ही हमनवा | महेंद्र कामा


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