राजर्षि छत्रपति शाहू महाराज के प्रमुख सामाजिक एवं शैक्षिक योगदान 26 जुलाई 1902 को कोल्हापुर रियासत के महाराजा राजर्षि छत्रपति शाहू महाराज ...
राजर्षि छत्रपति शाहू महाराज के प्रमुख सामाजिक एवं शैक्षिक योगदान
26 जुलाई 1902 को कोल्हापुर रियासत के महाराजा राजर्षि छत्रपति शाहू महाराज ने सरकारी नौकरियों में 50% आरक्षण लागू किया। इसे भारत में सामाजिक न्याय और आरक्षण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जाता है। उन्होंने शिक्षा, सामाजिक समानता और वंचित वर्गों के उत्थान के लिए अनेक महत्वपूर्ण कार्य किए।
शिक्षा एवं छात्र कल्याण
गरीब, पिछड़े और वंचित वर्ग के बच्चों के लिए निःशुल्क एवं अनिवार्य प्राथमिक शिक्षा की व्यवस्था की।
दूर-दराज़ से आने वाले दलित एवं पिछड़े विद्यार्थियों के लिए विशेष छात्रावास (हॉस्टल) बनवाए।
आर्थिक रूप से कमजोर तथा प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को छात्रवृत्तियाँ प्रदान कीं।
शिक्षा को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुँचाने के लिए विशेष प्रयास किए।
सामाजिक न्याय एवं सुधार
विद्यालयों में छुआछूत और जातिगत भेदभाव समाप्त करने के लिए सभी बच्चों को एक साथ बैठकर पढ़ने का आदेश दिया।
बाल विवाह पर रोक, विधवा पुनर्विवाह को कानूनी मान्यता तथा देवदासी प्रथा के उन्मूलन जैसे महत्वपूर्ण सामाजिक सुधार किए।
सामाजिक समानता और मानव गरिमा को बढ़ावा देने के लिए अनेक जनकल्याणकारी नीतियाँ लागू कीं।
डॉ. भीमराव आंबेडकर को सहयोग
डॉ. भीमराव आंबेडकर के सामाजिक न्याय के आंदोलन को समर्थन दिया।
उनके समाचार पत्र "मूकनायक" के प्रकाशन हेतु आर्थिक सहायता प्रदान की।
राजर्षि छत्रपति शाहू महाराज का संदेश था कि शिक्षा, समान अवसर और सामाजिक न्याय ही एक समतामूलक समाज की आधारशिला हैं।
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