दीनबंधु सर छोटू राम : किसानों के महान मसीहा सर छोटू राम (24 नवंबर 1881 – 9 जनवरी 1945) ब्रिटिश भारत के पंजाब प्रांत के एक महान कृषक नेता...
दीनबंधु सर छोटू राम : किसानों के महान मसीहा
सर छोटू राम (24 नवंबर 1881 – 9 जनवरी 1945) ब्रिटिश भारत के पंजाब प्रांत के एक महान कृषक नेता, समाज सुधारक, विचारक और जनसेवक थे। उन्हें "दीनबंधु" तथा "रहबर-ए-आज़म" के नाम से सम्मानित किया जाता है। उन्होंने किसानों को साहूकारों के शोषण से मुक्ति दिलाने, उनके अधिकारों की रक्षा करने तथा कृषि सुधारों की दिशा में ऐतिहासिक कार्य किए। भाखड़ा-नांगल परियोजना की प्रारंभिक परिकल्पना का श्रेय भी उन्हें दिया जाता है।
प्रारंभिक जीवन
सर छोटू राम का जन्म 24 नवंबर 1881 को हरियाणा के वर्तमान रोहतक जिले के गढ़ी सांपला गाँव में एक साधारण किसान परिवार में हुआ। उनका वास्तविक नाम राम रिछपाल था। उन्होंने दिल्ली के सेंट स्टीफंस कॉलेज से स्नातक तथा आगरा कॉलेज से एलएलबी की शिक्षा प्राप्त की।
किसानों के हित में ऐतिहासिक कार्य
• जाट गजट की स्थापना (1916):
उन्होंने 1916 में "जाट गजट" नामक समाचार पत्र प्रारंभ किया, जिसके माध्यम से किसानों को उनके अधिकारों और सामाजिक-राजनीतिक मुद्दों के प्रति जागरूक किया।
• यूनियनिस्ट पार्टी का गठन (1923):
सर सिकंदर हयात खान के साथ मिलकर उन्होंने यूनियनिस्ट पार्टी की स्थापना की। यह एक धर्मनिरपेक्ष राजनीतिक दल था, जिसने किसानों और ग्रामीण समाज के हितों को प्राथमिकता दी।
• किसानों को ऋण-जाल से मुक्ति:
उन्होंने किसानों को साहूकारों के शोषण से बचाने के लिए अनेक महत्वपूर्ण कानून लागू करवाए, जिनमें पंजाब रिलीफ ऑफ इंडेब्टेडनेस एक्ट, 1934 तथा कृषि विपणन संबंधी सुधार प्रमुख थे। इन कानूनों ने किसानों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान की।
• भाखड़ा-नांगल परियोजना की परिकल्पना:
सर छोटू राम ने सिंचाई और कृषि विकास के लिए बड़े बांधों की आवश्यकता पर बल दिया। भाखड़ा-नांगल परियोजना की प्रारंभिक सोच और उसके लिए प्रयासों का श्रेय भी उन्हें दिया जाता है।
सम्मान
किसानों, मजदूरों और वंचित वर्गों के उत्थान में उनके असाधारण योगदान के लिए ब्रिटिश सरकार ने 1937 में उन्हें "नाइट" (Sir) की उपाधि प्रदान की। जनता ने उन्हें प्रेमपूर्वक "दीनबंधु" तथा "रहबर-ए-आज़म" की उपाधियों से सम्मानित किया।
निधन
9 जनवरी 1945 को इस महान जननायक का निधन हो गया। आज भी उन्हें भारतीय किसान आंदोलन के अग्रणी नेताओं में गिना जाता है। उनका जीवन किसानों के अधिकार, सामाजिक न्याय और ग्रामीण विकास के लिए समर्पित रहा। उनके विचार और कार्य आज भी समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।

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