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मेरे अक्ष पर तू छा गया , MERE AKSH PAR TU CHAA GAYA | MAHENDRA CAMA

 जाने कितनी बातों को  हम अपनी जुबान पर नहीं लाये  दिल में बहुत गिले थे तुमसे  पर तुमको नहीं बताए  तुम तक ग़म न पहुंचे  इसी कशमकश में खुशियों ...


 जाने कितनी बातों को 

हम अपनी जुबान पर नहीं लाये 

दिल में बहुत गिले थे तुमसे 

पर तुमको नहीं बताए 

तुम तक ग़म न पहुंचे 

इसी कशमकश में खुशियों को छोड़कर 

हमने आपके गम है अपनायें 


नजरें हमेशा तलाशती रही 

तेरे प्यार को 

कई बहारें गुजार दी हमने 

कि सुनेगे तेरे इकरार को 

पर वो वक्त कभी आया ही नहीं 

हम हो जाएं एक वो एहसास 

कभी पाया ही नहीं 


बस एक ख्वाहिश सी है दिल में 

तेरे प्यार की 

न जाने क्यों अच्छी लगती है

ये घड़ी  तेरे इंतजार की 

पर मन में ये ख्याल आता है 

की तू आ गया है 

और मेरे अक्ष पर तू छा गया है 


~ मेरे अक्ष पर तू छा गया है | महेंद्र कामा 


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