मेरे अक्ष पर तू छा गया , MERE AKSH PAR TU CHAA GAYA | महेंद्र कामा / MAHENDRA CAMA
जाने कितनी बातों को हम अपनी जुबान पर नहीं लाये दिल में बहुत गिले थे तुमसे पर तुमको नहीं बताए तुम तक ग़म न पहुंचे इसी कशमकश में खुशियों ...
जाने कितनी बातों को हम अपनी जुबान पर नहीं लाये दिल में बहुत गिले थे तुमसे पर तुमको नहीं बताए तुम तक ग़म न पहुंचे इसी कशमकश में खुशियों ...